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learn to compromise with yourself

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 अपनों के साथ हमेशा *समझौता करना सीखिए* । क्योंकि थोड़ा सा झुक जाना किसी भी रिश्ते को हमेशा के लिए तोड देने से ज्यादा बेहतर है। www.mohitbhatiadvocate.com 

learn to compromise with yourself

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 अपनों के साथ हमेशा *समझौता करना सीखिए* । क्योंकि थोड़ा सा झुक जाना किसी भी रिश्ते को हमेशा के लिए तोड देने से ज्यादा बेहतर है। www.mohitbhatiadvocate.com 

Strength isn't in the voice keep it in your thoughts. #Motivation

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Strength isn't in the voice keep it in your thoughts. #Motivation #TuesdayMotivation 🍃🍂🍃🍂🍃🍂🍃🍂 ताकत आवाज में नहीं  अपने विचारों में रखो,,, क्योंकि फसल बारिश से होती हैं, बाढ़ से नहीं। रिश्ते बरकरार रखने की  सिर्फ एक ही शर्त हैं, भावना देखें, संभावना नहीं         🌲🌸सुप्रभात 🌸🌲

Don't let the enemy of ego grow inside you

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एक अहंकारी और शरारती तत्व ने पूछा कि आपको क्या लगता है मैं एक कामयाब इन्सान नहीं हूँ? जब तक तुम बड़ों का सम्मान और छोटो से प्यार नहीं करोगे और तुम्हारे साथ उनकी दुआएं नहीं रहेंगी तब तक तुम कामयाब नहीं हो सकते। दुआओं का भी हमारी सफलता में विशेष योगदान रहता है। मैं पूछता हूँ कि आखिर तुम ऐसी कामयाबी का करोगे क्या जिसका जश्न मनाने के लिए तुम्हारे साथ कोई ना हो। समाज में बहुत सारे ऐसे लोग होते हैं जिनका एटीट्यूड नेगेटिव होता है और वे नेगेटिव एटीट्यूड के साथ ही आगे बढ़ना चाहते है लेकिन नेगेटिव एटीट्यूड के साथ कोई भी सफल नहीं होता, आगे नहीं बढ़ सकता और यदि ऐसा होता भी है तो वह अपने लिए और समाज के लिए दोनों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। मनुष्य जब छोटा बच्चा होता है तब वह मात-पिता, भाई-बहन और अपने परिवार के सदस्यो के बिना रह नहीं पाता है, अपनी जरूरत की हर चीज के लिए उन पर निर्भर रहता है लेकिन जैसे-जैसे वह थोड़ा बड़ा होने लगता है,उसके आकार-विकार, आचार -विचार और आहार-विहार में धीरे-धीरे परिवर्तन होने लगता है। उसके अंदर अहंकार के तत्व जन्म लेने लगते है। मनुष्य एक अति स्वार्थी प्राणी है और व

परवरिश

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आजकल के बच्चों की जिस तरीके से परवरिश हो रही है वह काफी चिंताजनक है। जहां पहले एक - दो साल का रोता हुआ बच्चा मां की गोद में जाते ही चुप हो जाता था वही आज उसके हाथ में मोबाइल आने पर ही चुप होता है। पहले बच्चे दादा-दादी, नाना-नानी और मां की लोरियां और कहानियां सुनकर सो जाया करते थे लेकिन आज वे मोबाइल, टीवी, टेबलेट में कार्टून और Poem देख कर ही सोते हैं।  पहले बच्चे को उठते ही दूध की आवश्यकता होती थी और जब उसकी मां दूध से भरी हुई बोतल उसके होठों से लगा देती थी तो बच्चा दूध पीते-पीते ही फिर से सो जाया करता था लेकिन आज बच्चे को उठते ही उसके मां-बाप उसे चुप कराने के लिए उसके हाथों में मोबाइल या टैबलेट थमा देते हैं। बच्चे को भी अब दूध की आवश्यकता नहीं है। पहले जॉइंट फैमिली में बच्चे अपनी जरूरत की छोटी-छोटी चीजों के लिए दादा-दादी, नाना-नानी पर निर्भर रहते थे लेकिन अब एकल परिवारों में भी बच्चों को किसी के सहारे की आवश्यकता ही नहीं रह गई है। अब बच्चों का परिवेश इतना बदल गया है कि दादा-दादी बच्चे को प्यार से दिन भर पुकारते रहते हैं लेकिन बच्चा उनके पास जाने को भी तैयार नहीं है क्योंकि उन्ह

एक राजा ने दो लोगों को मौत की सजा सुनाई लेकिन पहले वाले ने फिर भी बचा ली जान..

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एक राजा ने दो लोगों को मौत की सजा सुनाई । उसमें से एक यह जानता था कि राजा को अपने घोड़े से बहुत ज्यादा प्यार है । उसने राजा से कहा कि यदि मेरी जान बख्श दी जाए तो मैं एक साल में उसके घोड़े को उड़ना सीखा दूँगा । Pixels image  यह सुनकर राजा खुश हो गया कि वह दुनिया के इकलौते उड़ने वाले घोड़े की सवारी कर सकता है । दूसरे कैदी ने अपने मित्र की ओर अविश्वास की नजर से देखा और बोला, तुम जानते हो कि कोई भी घोड़ा उड़ नहीं सकता ! तुमने इस तरह पागलपन की बात सोची भी कैसे ? तुम तो अपनी मौत को एक साल के लिए टाल रहे हो । पहला कैदी बोला, ऐसी बात नहीं है । मैंने दरअसल खुद को स्वतंत्रता के चार मौके दिए हैं .. पहली बात राजा एक साल के भीतर मर सकता है ! दूसरी बात मैं मर सकता हूं ! तीसरी बात घोड़ा मर सकता है ! और चौथी बात… हो सकता है, मैं घोड़े को उड़ना सीखा दूं !! हमने कहानी से क्या सीखा ? What did we learn from the story ? बुरी से बुरी परिस्थितियों में भी आशा नहीं छोड़नी चाहिए। कोरोनावायरस से संक्रमित मरीजो का रिकवरी रेट बढ़ रहा हैं, पॉज़िटिवीटी रेट घट रहा हैं, बिस्तर बढ़ रहे हैं, आक़्सिजन बढ़

जिस विदेशी कम्पनीं ने रतन टाटा को अपमानित किया था उसी को खरीदकर दिखाई अपनी दरियादिली

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  रतन टाटा हिंदुस्तान ही नहीं बल्कि दुनिया की उन चुनिंदा शख्सियतों में से एक हैं जो कि हमेशा ही अपनी दरियादिली के लिए जाने जाते हैं।  जिंदगी में कुछ कर गुजरने की अगर चाहत हो तो लक्ष्य चाहे कितना भी मुश्किल क्यों ना हो उसे कठिन परिश्रम और अनुशासन से पाया जा सकता है यह बात  हमें टाटा मोटर्स के संस्थापक श्री रतन टाटा जी के जीवन से सीखने को मिलती है। Ratan Tata आज हम आपको बताएंगे उन्हीं की जिंदगी से जुड़ा हुआ एक महत्वपूर्ण किस्सा जो आपको जीवन भर मोटिवेट करेगा और आगे बढ़ने के लिए हमेशा प्रेरित करता रहेगा। टाटा समूह देश के सबसे बड़े औद्योगिक घरानो मेंं से एक है जिसके एक सामान्य से कर्मचारी और बाद में सबसे अधिक समय तक चेयरमैन रहे रतन टाटा रिटायरमेंट के बाद भी समाज हित में, देश हित में कुछ ना कुछ  योगदान  देते ही रहते हैं जैसे कि वे  कोरोनावायरस जैसी महामारी के समय भी देश के साथ खड़े रहे और उन्होंने लगभग 25 सौ करोड रुपए की धनराशि प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा करवाई। बात 1998 की है जब रतन टाटा ने ऑटोमोबाइल्स के फिल्ड में हाथ आजमाया और देश में टाटा इंडिका के रूप में टाटा कंपनी की पहली गाड़ी  लॉ