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learn to compromise with yourself

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 अपनों के साथ हमेशा *समझौता करना सीखिए* । क्योंकि थोड़ा सा झुक जाना किसी भी रिश्ते को हमेशा के लिए तोड देने से ज्यादा बेहतर है। www.mohitbhatiadvocate.com 

Some important guidelines given by Adhivakta Law Cafe regarding avoiding frauds in the name of Covid-19

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अधिवक्ता लाॅ कैफे द्वारा कोरोना वायरस के नाम पर हो रही ठगी से बचने के सम्बन्ध में बताए गए कुछ महत्वपूर्ण दिशानिर्देश वर्तमान समय में करोना महामारी के प्रकोप के चलते रेमडेसिवीर  इंजेक्शन , अस्पतालो में बैंड के व्यवस्था तथा ऑक्सीजन सिलेंडरों के नाम पर सोशल साइट्स/ऐप्स के माध्यम से फ्राड हो रहे हैं- A- गूगल पर अस्पतालो/मेडिकल अदि का फर्जी नंबर डालकर तथा फोन पर वहां का कर्मचारी बनकर एडवांस पेमेन्ट लेकर ठगी की  जा रहीं है। B- मरीजो के परिजनो की डिटेल, जो उनके द्वारा मदद मांगने के लिए के पोस्ट की  जा रही है, का दुरूपयोग करके उन्हें कॉल कर के सोशल मीडिया पर एडवांस पेमेन्ट लेकर ठगी की जा रही हैं। C-  ठगी करने वाले फर्जी वैबसाइट, इ-कॉमर्स प्लेटफॉर्म,सोशल मिडिया एकांउट और Email बनाते हैं। जो मैडिकल उत्पादों को बेचने और देंने का दावा करते हैं और पिड़ीतो को बैंक हस्तांतरण/‌UPI के माध्यम से भुगतान करने के लिए कहा जाता है। D-  ई-मेल , महामारी से सम्बंधित लिंक, स्वास्थ्य आधिकारी होने का दावा करने वाले अपराधियों के द्वारा भेजे जाते है जिसका उद्देश्य पीडितों को एक विशिष्ट/ फर्जी वेबपेज पर ले जाकर उ

The Delhi Court has extended the judicial custody of Olympian Sushil Kumar, accused in the Chhatrasal murder case, till June 25.

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दिल्ली कोर्ट ने छत्रसाल मर्डर केस में आरोपी ओलंपियन सुशील कुमार की जुडिशल कस्टडी को 25 जून तक के लिए बढ़ा दिया।   Kapil Sharma & Sushil Kumar  What is the matter : दिल्ली पुलिस  की एफ आई आर के अनुसार सुशील कुमार  और उसके अन्य साथी द्वारा पहलवान सोनू धनखड को उसके फ्लैट से गन पॉइंट पर जबरन किडनैप करके रात में छत्रसाल स्टेडियम  लाया गया और वहां पर उसकी लाठी-डंडों से निर्दयता पूर्वक खूब पिटाई की गई,  जिससे कि उसकी मृत्यु हो गई. जिसमें दिल्ली के मॉडल टाउन थाने पर अंतर्गत धारा 308/325/323/341/506/188/ 269/34  आईपीसी और 25/54/59 आर्म्स एक्ट में मुकदमा पंजीकृत किया गया. दिल्ली की रोहिणी कोर्ट ने पिछले महीने सुशील कुमार को अग्रिम जमानत देने से भी इनकार कर दिया था. जिसमें न्यायालय का यह मानना था कि अभियुक्त पर लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं. अब तक की जांच का अवलोकन करने से प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि प्रार्थी/अभियुक्त ही मुख्य साजिशकर्ता है और प्रथम सूचना रिपोर्ट कोई विश्वकोश नहीं है विवेचना अभी जारी है. प्रार्थी/अभियुक्त के खिलाफ पहले से ही गैर जमानती वारंट जारी है. अत