Posts

Showing posts with the label सम्राट अकबर और तानसेन

learn to compromise with yourself

Image
 अपनों के साथ हमेशा *समझौता करना सीखिए* । क्योंकि थोड़ा सा झुक जाना किसी भी रिश्ते को हमेशा के लिए तोड देने से ज्यादा बेहतर है। www.mohitbhatiadvocate.com 

दुनिया की कोई भी कला बंधन में नहीं निखर सकती।

Image
सम्राट अकबर के दरबार में नौ नवरत्न हुआ करते थे। तानसेन सम्राट अकबर के नवरत्नों में से एक थे,तानसेन अपने समय के बहुत ही प्रसिद्ध संगीतज्ञ थे।  संगीत सम्राट तानसेन  तानसेन और सम्राट अकबर के बीच बहुत ही मधुर संबंध थे। लेकिन राजा आखिर राजा ही होता है और सेवक हमेशा सेवक ही रहता है चाहे वह राजा का कितना ही करीबी क्यों ना हो। यह बात तानसेन अच्छी तरह से समझते थे और इसी बात का दर्द उन्हें हमेशा परेशान करता था। एक दिन बुरा न मानने की शर्त पर सम्राट अकबर ने तानसेन से कहा कि इस बात में कोई शक नहीं है कि तुम बहुत अच्छा गाते हो और बहुत ही सुरीली आवाज से सबका दिल जीत लेते हो लेकिन जो बात तुम्हारे  गुरु के गायन में है वह तुम्हारे गायन में नहीं । तुम्हारे गुरू स्वामी हरिदास की वाणीं में एक अलग ही आत्मिक आनंद और स्वर्गीय अनुभूति का अनुभव होता है। क्या तुम इसका कारण बता सकते हो? कंठ तो तुम्हारा भी उतना ही मधुर है। राग-रागनियों पर तुम्हारा भी सम्पूर्ण अधिकार है। स्वर-लय-ताल में कोई भंग नहीं है। बल्कि तुम्हारी प्रसिद्धी तो अपने गुरू स्वामी हरिदास जी से ज्यादा ही है। लेकिन ऐसी कौन सी वजह है कि तुम्हारे संगी